IN Crisil Ratings की रिपोर्ट: 2025-26 में भारत का पोल्ट्री सेक्टर — संभव राजस्व वृद्धि पर नज़र

Crisil Ratings रिपोर्ट: 2025-26 में भारत के पोल्ट्री सेक्टर में 4–6% राजस्व वृद्धि की उम्मीद। ब्रॉयलर उद्योग, मांग, चुनौतियाँ और भविष्य का विस्तृत विश्लेषण।

11/29/20251 min read

भारत का पोल्ट्री उद्योग—जिसमें ब्रॉयलर और लेयर दोनों शामिल हैं—देश के सबसे तेजी से बढ़ते एग्री-बिजनेस सेक्टर्स में से एक है। Crisil Ratings की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में पोल्ट्री सेक्टर 4–6% तक राजस्व वृद्धि हासिल कर सकता है। यह संकेत देता है कि भारत में चिकन व अंडों की खपत तेजी से बढ़ रही है और आने वाले सालों में इस सेक्टर में अच्छे अवसर मौजूद हैं।

इस ब्लॉग में Crisil की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष, चुनौतियाँ और किसानों/उद्योग के लिए इसका क्या मतलब है—सब कुछ सरल भाषा में समझाया गया है।

1. पोल्ट्री सेक्टर में 4–6% संभावित राजस्व वृद्धि

Crisil Ratings के मुताबिक आने वाले वित्त वर्ष में भारत का पोल्ट्री मार्केट मजबूत प्रदर्शन कर सकता है।
मुख्य कारण:

  • चिकन और अंडों की घरेलू मांग में लगातार बढ़ोतरी

  • शहरी क्षेत्रों में प्रोटीन खपत बढ़ना

  • ब्रॉयलर मीट की सस्ती कीमत की तुलना में अन्य मीट विकल्प महंगे होना

  • Quick Service Restaurants (QSR) और ऑनलाइन फूड डिलीवरी की तेजी से वृद्धि

इसका लाभ छोटे व बड़े दोनों तरह के पोल्ट्री किसानों को मिलेगा।

2. मांग मजबूत है, लेकिन प्रॉफिट मार्जिन दबाव में

हालाँकि राजस्व बढ़ने की संभावना है, फिर भी Crisil रिपोर्ट कहती है कि ब्रॉयलर सेक्टर का प्रॉफिट मार्जिन स्थिर या थोड़ा कम रह सकता है।
इसके पीछे कई कारण हैं:

  • फीड की बढ़ती लागत (मक्का और सोयाबीन की कीमतें अस्थिर)

  • रियलाइजेशन रेट (बाजार में ब्रॉयलर कीमतें) कई बार अचानक गिर जाती हैं

  • वायरल रोगों और मौसम के कारण मृत्यु दर बढ़ सकती है

  • लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट का बढ़ना

यानी—राजस्व बढ़ेगा, लेकिन लाभ उतना मजबूत नहीं रहेगा।

3. ब्रॉयलर किसानों के लिए क्या मतलब है?

यह रिपोर्ट ब्रॉयलर फार्मर्स को तीन बड़ी बातें संकेत देती है:

✔ (1) मांग मजबूत है → उत्पादन बढ़ाना फायदेमंद

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उपभोग बढ़ रहा है।
यह किसानों के लिए अच्छा संकेत है।

✔ (2) फीड कॉस्ट नियंत्रण → प्रॉफिट बचाने की कुंजी

फीड लागत कुल लागत का 60–70% होती है।
सही फीड मैनेजमेंट, bulk खरीद और विकल्पों का उपयोग लाभ बचा सकता है।

✔ (3) रोग नियंत्रण और बायोसिक्योरिटी → अत्यंत आवश्यक

रोग फैलने से पूरा बैच प्रभावित हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, जो किसान बायोसिक्योरिटी पर खर्च करते हैं, उनका प्रॉफिट स्थिर रहता है।

4. उद्योग के लिए Crisil के अन्य महत्वपूर्ण संकेत
  • ऑर्गनाइज़्ड पोल्ट्री कंपनियाँ तेजी से बढ़ेंगी
    क्योंकि वे आधुनिक तकनीकों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और ऊँचे स्केल पर काम कर रही हैं।

  • कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की मांग बढ़ेगी
    छोटे किसानों को स्थिर आय मिलती है, और कंपनियों को गुणवत्ता व सप्लाई सुरक्षित होती है।

  • प्रोसेस्ड चिकन की डिमांड बढ़ेगी
    जैसे—चिकन नगेट्स, पॉपकॉर्न, बर्गर पैटी आदि।

5. 2025-26 में पोल्ट्री सेक्टर को कौन-सी चुनौतियाँ रहेंगी?
1. मक्का और सोयाबीन की कीमतों में उतार-चढ़ाव

फीड कीमतें बढ़ने से प्रॉफिट पर सीधा असर होता है।

2. बीमारी का खतरा

खासकर सर्दी और बारिश के मौसम में।

3. बाजार में कीमतों की अनिश्चितता

कभी कीमतें अचानक बढ़ती हैं, कभी एकदम नीचे गिर जाती हैं।

4. प्रोसेस उद्योग और किसानों में गैप

छोटे किसानों को प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुँच कम है—जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ता है।

6. भविष्य की संभावनाएँ (Outlook)

Crisil के अनुसार:

  • भारत का पोल्ट्री उद्योग लगातार बढ़ेगा

  • चिकन सबसे सस्ता प्रोटीन स्रोत बना रहेगा

  • नए स्टार्टअप, प्रोसेसिंग यूनिट और QSR सेक्टर इस उद्योग को बड़ा बनाएँगे

  • तकनीक → फीड ऑटोमेशन, क्लाइमेट कंट्रोल शेड, फार्म डेटा एनालिसिस का उपयोग तेज़ी से बढ़ेगा

अर्थात कुल मिलाकर 2025-26 पोल्ट्री सेक्टर के लिए सकारात्मक वर्ष होगा

निष्कर्ष

Crisil Ratings की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत का पोल्ट्री सेक्टर 2025-26 में अच्छी वृद्धि दिखाएगा।
हालाँकि लागत और मूल्य अस्थिरता के कारण मुनाफ़ा थोड़ा प्रभावित हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर उद्योग में बेहतर अवसर, स्थिर मांग और मजबूत भविष्य दिखाई देता है।

जो किसान और निवेशक सही प्रबंधन, लागत नियंत्रण और बायोसिक्योरिटी रणनीति अपनाएँगे, उन्हें इस वृद्धि का सीधा लाभ मिलेगा।